भाकृअनुप–केन्द्रीय अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान में राजभाषा हिन्दी के संकल्प के साथ हिन्दी पखवाड़ा–2026 का समापन
28 सितंबर 2026
बैरकपुर
भाकृअनुप–केन्द्रीय अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर में हिन्दी पखवाड़ा–2026 का समापन समारोह 28 सितंबर 2026 को संस्थान के नवीन प्रेक्षागृह में हर्षोल्लास, उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। समारोह का मुख्य उद्देश्य राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार, कार्यालयीन कार्यों में हिन्दी के अधिकाधिक एवं सहज प्रयोग तथा अधिकारियों एवं कर्मचारियों में हिन्दी के प्रति रुचि, जागरूकता एवं प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम् एवं भाकृअनुप गीत से हुआ। इसके पश्चात समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. विचित्रसेन गुप्त, उप निदेशक (कार्यान्वयन), राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार, कोलकाता का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया।
समारोह में डॉ. श्रीकान्त सामन्ता, प्रभागाध्यक्ष एवं हिन्दी कक्ष के सर्वकार्याधिकारी ने मुख्य अतिथि, संस्थान के निदेशक, वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने हिन्दी पखवाड़े के आयोजन की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राजभाषा हिन्दी का प्रयोग केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि कार्यालयीन कार्यों को अधिक सहज, प्रभावी एवं जनोन्मुख बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने सभी से अपने दैनिक कार्यों में हिन्दी के अधिकाधिक प्रयोग का आह्वान किया।

इसके पश्चात श्री संजीव कुमार साहू, वैज्ञानिक ने हिन्दी पखवाड़े के दौरान आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों एवं प्रतियोगिताओं की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने विभिन्न गतिविधियों में अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता का उल्लेख करते हुए हिन्दी के प्रति संस्थान में बढ़ती रुचि एवं सकारात्मक वातावरण को रेखांकित किया। इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। “भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, हमारी सभ्यता और पहचान का आधार है”
संस्थान के निदेशक डॉ. प्रदीप डे ने अपने संबोधन में राजभाषा हिन्दी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से दैनिक कार्यालयीन कार्यों में हिन्दी का अधिकाधिक प्रयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने भाषा को मानव सभ्यता के विकास, विचारों के आदान-प्रदान तथा ज्ञान के संचरण का एक अत्यंत महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने होमोसेपियन्स के विकास के संदर्भ में भाषा की विशिष्ट भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि भाषा ने मनुष्य को अपने अनुभवों को साझा करने, सामाजिक सहयोग स्थापित करने तथा ज्ञान को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने में सक्षम बनाया है। इसी क्रम में उन्होंने स्वभाषा में सोचने, समझने और ज्ञान अर्जित करने के महत्व पर विशेष बल दिया। निदेशक महोदय ने कहा कि मातृभाषा व्यक्ति की सहज अभिव्यक्ति, सांस्कृतिक चेतना और बौद्धिक विकास का आधार है। अपनी भाषा के प्रति सम्मान का अर्थ अन्य भाषाओं की उपेक्षा करना नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध भाषाई विविधता और प्रत्येक भाषा के महत्व को स्वीकार करना है। उन्होंने हिन्दी को कार्यालयीन कार्यों में सहज रूप से अपनाने तथा राजभाषा के प्रयोग को व्यवहार का स्वाभाविक हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

उन्होंने हिन्दी पखवाड़े के सफल आयोजन के लिए हिन्दी कक्ष तथा आयोजन से जुड़े सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समर्पित प्रयासों की सराहना की और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से हिन्दी के प्रति सकारात्मक वातावरण को और सुदृढ़ करने की अपेक्षा व्यक्त की।
चार महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन
समारोह के अवसर पर संस्थान की ज्ञान एवं अनुसंधान-परंपरा को प्रतिबिंबित करने वाले चार महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। इनमें शामिल हैं—
(1) सजावटी मछली पालन एवं प्रबंधन,
(2) भाकृअनुप–केन्द्रीय अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान द्वारा गत 80 वर्षों में विकसित प्रौद्योगिकियाँ,
(3) भारतीय सुंदरवन का मूल्यांकन : पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ, आजीविका एवं संरक्षण,
(4) संस्थान का मासिक न्यूजलेटर – सितंबर 2026
इन प्रकाशनों का विमोचन संस्थान के वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, मत्स्य क्षेत्र में योगदान तथा भारतीय सुंदरवन के संरक्षण एवं आजीविका से जुड़े कार्यों को व्यापक रूप से सामने लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा।
  राजभाषा के प्रभावी कार्यान्वयन पर विशेष बल
समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. विचित्रसेन गुप्त, उप निदेशक (कार्यान्वयन), राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार, कोलकाता ने अपने संबोधन में राजभाषा हिन्दी के संवैधानिक महत्व तथा सरकारी कार्यालयों में हिन्दी के प्रभावी कार्यान्वयन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने स्व-धर्म और स्व-भाषा के बीच सामंजस्य स्थापित करते हुए स्वभाषा के विकास, सम्मान एवं व्यवहार में उसके अधिकाधिक प्रयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राजभाषा नीति का प्रभावी अनुपालन केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सामूहिक सहभागिता और सकारात्मक दृष्टिकोण से ही सार्थक रूप से सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने कार्यालयीन कार्यों में हिन्दी के प्रयोग को बढ़ावा देने तथा राजभाषा नीति के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. मितेश रामटेके, वैज्ञानिक ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए मुख्य अतिथि, संस्थान के निदेशक, प्रभागाध्यक्ष, वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों तथा हिन्दी पखवाड़े के सफल आयोजन में प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से योगदान देने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया।


राष्ट्रगान के साथ इस समारोह का समापन हुआ।
हिन्दी पखवाड़ा–2026 का यह समापन समारोह केवल एक औपचारिक आयोजन न होकर राजभाषा हिन्दी के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करने, कार्यालयीन कार्यों में हिन्दी के सहज एवं प्रभावी प्रयोग को प्रोत्साहित करने तथा हिन्दी को ज्ञान, विज्ञान और प्रशासन की प्रभावी भाषा के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक सार्थक एवं प्रेरणादायी पहल के रूप में सफल रहा।






This website belongs to ICAR-Central Inland Fisheries Research Institute, Indian Council of Agricultural Research, an autonomous organization under the Department of Agricultural Research and Education, Ministry of Agriculture & Farmers Welfare, Government of India. Copyright @ 2010 ICAR, This website is developed & maintained by Agricultural Knowledge Management Unit.
2017 Last updated on 05/10/2026