छत्तीसगढ़ के आदिवासी मत्स्य कृषकों की भागीदारी से जलाशय मत्स्य उत्पादन में वृद्धि : सिफ़री की नई पहल
2nd मार्च, 2022
भारत सरकार के अनुसूचित जनजाति घटक के तहत भाकृअनुप- केन्द्रीय अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान(सिफ़री) ने आदिवासी समुदाय द्वारा परिचालित और प्रबंधित10 जलाशयों में जलाशय के सहकारी समिति और छत्तीसगढ़ मत्स्य पालन विभाग की सहयोगिता से एक उत्पादन वृद्धि कार्यक्रम की शुरूवात की । संस्थान के निदेशक डॉ. बि .के. दास के नेतृत्व में यह निर्णय लिया गया कि जलाशय में पेनकल्चर के लिए 2 टन पेन, इंजन के साथ नाव और 2 टन मछली का चारा मछली के बीज के पालन के लिए उपलब्ध कराया जाएगा । कोविड महामारी की स्थिति और प्रक्रिया को गति देने के लिए एक ऑनलाइन बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में छत्तीसगढ़ मत्स्य पालन विभाग के निदेशक श्री एन.एस. नाग; राज्य मत्स्य विभाग के बारह अधिकारी (एडीएफ, मत्स्य पालन); और छत्तीसगढ़ की दस प्राथमिक मछुआरा सहकारी समितियों (पीएफसीएस) के सदस्य शामिल थे। डॉ. बि. के. दास ने प्रतिभागियों को बधाई दी और छत्तीसगढ़ के अन्तर्स्थलीय खुले पानी की मछली उत्पादन स्तर और उत्पादकता में सुधार के लिए पेन कल्चर के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने टिप्पणी की कि छत्तीसगढ़ के 10 विभिन्न जलाशयों में पहली बार सिफ़री के हस्तक्षेप से बीस मॉडल पेन प्रदर्शन किए जाएंगे। झारखंड में भी सिफ़री द्वारा इसी तरह के हस्तक्षेप किए गए जिससे वहाँ के जलाशय उत्पादकता स्तर में वृद्धि हुई है। सिफ़री के निदेशक डॉ. बि. के दास और छत्तीसगढ़ के मत्स्य पालन निदेशक श्री एन.एस. नाग, दोनों ही इस बात पर सहमत हुए कि राज्य में स्थापित होने वाले पेन कल्चर की नियोजित गतिविधियों में प्राथमिक मछुआरा सहकारी समितियों (पीएफसीएस) के सदस्यों की बड़ी भूमिका है।

पेन कल्चर तकनीक की स्थापना से इन जलाशयों से अतिरिक्त 200 टन मछली उत्पादन की आशा हैं। यह अनुमान किया जा रहा है कि अंगुलिकायों को पेन में प्रतिपालित किया जा सकेगा और नाबार्ड और दूसरे बैंकों से आर्थिक सहायता प्राप्त करते हुए अन्तर्स्थलीय मछुआरों की स्थिति में सुधार आएगा और यह एक मॉडल के रूप में स्थापित होगा । इससे परिवहन के करण मृत्यु दर और वांछित अंगुलिकायों की अनुपलब्धता कम हो जाएगी जो उत्पादन बढ़ाने में एक प्रमुख बाधा रही है। पुंटियस सराना मॉडल को भारतीय प्रमुख कार्प (आईएमसी) के साथ स्टॉकिंग किया जा सकता है, क्योंकि यह एक ऑटो ब्रीडर है और इससे एक सिस्टम स्थापित किया जा सकता है। डॉ. दास ने प्राथमिक मछुआरा सहकारी समितियों (पीएफसीएस) के सदस्यों को सलाह दी कि वे अपने उद्यम को एक रिवॉल्विंग फंड के साथ शुरू करें जिससे वे अपनी वित्तीय गतिविधियों को अपने दम पर बनाए रख सकें। छत्तीसगढ़ मत्स्य पालन विभाग के निदेशक श्री एन.एस. नाग ने बैठक में बताया कि वे अन्तर्स्थलीय खुले जल निकायों में पेन लगाने के लिए तैयार हैं और इस नियोजित गतिविधियों में सिफ़री को रसद सहायता प्रदान करने के लिए भी तैयार हैं। प्राथमिक मछुआरा सहकारी समितियों (पीएफसीएस) के सदस्यों, राज्य विभाग के एडीएफ और सिफ़री के वैज्ञानिकों के बीच पेन कल्चर प्रबंधन प्रथाओं के बारे में बातचीत हुई, जिनका छत्तीसगढ़ में पालन किया जाएगा। बैठक में सिफ़री की ओर से डॉ. ए. के. दास, डॉ. अपर्णा रॉय, डॉ. पी. के परिदा, डॉ. लियामथुमलुआइया, डॉ. सतीश कौशलेश, डॉ. पियासी देबरॉय सहित वैज्ञानिकों की एक टीम उपस्थित थी।




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