सिफरी द्वारा दस हजार मछली को संरक्षण के लिए गंगा नदी में छोड़ा गया
28 मार्च, 2022
गंगा नदी में विलुप्त हो रहे मत्स्य प्रजातियों के संरक्षण एवम् संवर्धन को ध्यान में रखते हुए,भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् -केन्द्रीय अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान , प्रयागराज के द्वारा दिनांक 28 मार्च 2022 को, पवित्र पावन गंगा और यमुना के संगम तट पर गंगा नदी में 10000 (दस हजार) भारतीय प्रमुख कार्प-कतला, रोहू, मृगल मछलियों के बीज को रैंचिंग कार्यक्रम के तहत छोड़ा गया। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के अन्तर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में संस्थान के केन्द्राध्यक्ष डा० डी एन झा ने उपस्थित लोगों को नमामि गंगे परियोजना के बारे में जानकारी दी जिसके अन्तर्गत पुरे गंगा नदी में कम हो रहे महत्वपूर्ण मत्स्य प्रजातियों के बीज का रैंचिंग होना रखा है साथ ही लोगो को गंगा के जैव विविधता और स्वच्छता के बारे में जागरूक करना है। संस्थान के वैज्ञानिक डा० अबसार आलम ने समारोह को सम्बोधित करते हुए गंगा नदी में मछली और रैंचिंग के महत्व को बताया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महन्त श्री बलवीर गिरि जी महाराज, पीठाधीष्वर श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी, प्रयागराज, ने मानव सभ्यता के लिए गंगा के महत्व को बताया और गंगा को स्वच्छ रखने एवम जैव विविधता को बचाने के लिए उपस्थित लोगों से आह्वान किया। इस अवसर पर श्री राजेश शर्मा, प्रांत संयोजक गंगा विचार मंच, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार, ने मंत्रालय द्वारा गंगा सफाई के लिए किए कार्यो का उल्लेख किया तथा गंगा को साफ रखने के लिए शपथ दिलाया। गंगा स्नान करने आये स्नानार्थियों और मछुआरों ने भी सभा में अपनी बातों को रखा और सभी ने गंगा के प्रति जागरूक होने के साथ ही गंगा को स्वच्छ रखने का संकल्प व्यक्त किया। ।

कार्यक्रम में स्नानार्थियों के साथ साथ आस-पास गाव के मत्स्य पालक, मत्स्य व्यवसायी तथा गंगा तट पर रहने वाले स्थानीय लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अन्त में संस्थान के वैज्ञानिक डा० वेंकटेश ठाकुर ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए आस्वस्त किया कि समाज के भगीदारी से हम इस परियोजना के उद्देष्यों को पाने में सफलता प्राप्त करेंगे। कार्यक्रम में संस्थान के शोधार्थी डा० संदीप कुमार मिश्र, श्री शिवजनम वर्मा, श्री संदीप मिश्रा, श्री दुर्गेश वर्मा आदि ने भाग लिया और सभा को सम्बोधित किया।





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